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एक प्रोफेसर

कहानी1 year ago16 Views

एक बार एक प्रोफेसर एक क्लासरूम में जाता है और पानी का ग्लास पकड़के बच्चो के सामने खड़े हो जाता है और कहता है “बच्चो बताओ, इस पानी की ग्लास की Weight क्या होगा”

बच्चे कहता है “पानी और ग्लास मिलाके होगा 400-500 ग्राम। इससे ज्यादा नहीं होगा”

वो प्रोफेसर फिर से पूछता है बच्चो को की “अगर मैं इसको एक घंटा पकड़ा रखूं तो ?”

बच्चे कहता है “अगर एक घंटा पकड़े रखोगे तो आपको ये बहुत भारी लगने लगेगा।”

प्रोफेसर कहता है “अच्छा, अगर पूरा दिन पकड़ी रखूँ ?” 

बच्चे कहता है “आपकी जान निकल जाएगी, हो सकता आपकी मसल्स स्टिफ हो जाये, आपको बहुत दर्द होगी, आप उसको सह नहीं पाएंगी, पैरालायसिस जैसी फिल्लिंग होगी।”

प्रोफेसर फिर से कहता है “अगर मैं इसे कुछ दिन और पकडे रखूँ ?”

बच्चे कहता है “तब आपकी बाहु हो सकता है रिमूव करनी पड़े। हो सकता है ऑपरेशन करना पड़े। इतना बुरा हाल हो सकता है। इतना भारी फील हो सकता है।

फिर जो बात उस प्रोफेसर ने कही है की जैसे उस पानी की ग्लास का weight कुछ भी नहीं हैं, लेकिन अगर पकडे रखो तो ये भारी होता जायेगा, बहुत नुकसान करेगा।

इसी तरह तरह से हमारे failures, हमारी disappointments, हमारी निराशा उसका weight कुछ भी नहीं होता, लेकिन अगर हम उसको पकड़े रखते हैं, छोड़ते नहीं अपने साथ रखते हैं, इसलिए वो हमारा नुकसान करता रहता है।

आप ने पिछले दिनों, महीनो या सालों में जो कुछ गलती करि, जो भी फेलियर का सामना किया आप उससे सीखके आगे बढिये उसको पकडे मत रखिये।

अपने बड़े Goals को छोटे छोटे goals में भाग करो और एक नई एनर्जी और नई जोश के साथ आगे बढ़ो। और एक बात हमेशा याद रखे की अगर आप आज मेहनत और स्मार्ट वर्क करोगे तो आपका आने वाला कल स्मार्ट ही होगा, लेकिन अगर आप आज कुछ एक्शन नहीं लोगे तो आज आप जिस स्तिथि में है कल भी उसी स्तिथि में रहेंगे। इसका मतलब आपका आने वाला कल आपके हाथ में ही है।

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